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महा-विस्फोट अघोर ब्रह्मास्त्र तांत्रिक सुरक्षा और शत्रु पहचानने का मंत्र

अघोर ब्रह्मास्त्र और शत्रु पहचान विधि

तंत्र शास्त्र में आत्म-रक्षा और नकारात्मक ऊर्जा के निवारण के लिए कई गुप्त विधियाँ बताई गई हैं। जब जीवन में अचानक बाधाएं आने लगें, घर में अशांति हो या शरीर पर भारीपन महसूस हो, तो यह 'अभिचार' या 'तांत्रिक चौकी' का संकेत हो सकता है। इस लेख में हम दसों महाविद्याओं की संयुक्त शक्ति और गुप्त शत्रु को पहचानने की विधि के बारे में जानेंगे।

1. गुप्त शत्रु को कैसे पहचानें?

अक्सर हमें पता नहीं होता कि हमारे पीछे कौन सी शक्ति या व्यक्ति काम कर रहा है। इसके लिए स्वप्न वाराही विधि सर्वोत्तम मानी गई है।

"ॐ ह्रीं नमः वाराही सर्व-शत्रु-मुख-स्तम्भिनी, मम स्वप्ने दर्शनं देहि, सत्यं ब्रूहि-ब्रूहि स्वाहा ॥"

विधि:

  • रात्रि में सोने से पहले हाथ-पैर धोकर उत्तर दिशा की ओर मुख करें।
  • उपरोक्त मन्त्र का 108 बार जाप करें।
  • मन में सत्य जानने का दृढ़ संकल्प लेकर सो जाएँ।
  • 3 से 7 दिनों के भीतर स्वप्न के माध्यम से संकेत या चेहरा स्पष्ट होने लगता है।
महा-विस्फोट अघोर ब्रह्मास्त्र तांत्रिक सुरक्षा और शत्रु पहचानने का मंत्र


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2. महा-विस्फोट अघोर ब्रह्मास्त्र मन्त्र

यदि आपको पुष्टि हो जाए कि आप पर कोई तांत्रिक प्रयोग हुआ है, तो यह मन्त्र उसे जड़ से खत्म करने और वापस पलटने के लिए एक 'अस्त्र' की तरह कार्य करता है।

"ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं क्षौं प्रिं हुं फट्, महा-अघोर-ब्रह्मास्त्राय हुं फट् ॥
ॐ सम्पुटित दश-महाविद्यायै, दक्षिण कालिके, महा-तारे, छिन्नमस्ते, श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं, मसान-भूत-प्रेत-पिशाच-जिन्न-जिन्नाद-डाकिनी-शाकिनी, मारि-मसान-कृत्या-अभिचारं, टोना-टोटका, गड़ित-चौकी, शरीर-बन्धनं, सकल-दुष्ट-शक्तयः,
हन-हन, दह-दह, पच-पच, मद-मद, उत्कीलय-उत्कीलय, विदारय-विदारय, भिन्धि-भिन्धि, स्फोटय-स्फोटय, उच्छेदय-उच्छेदय, ब्रह्म-दण्डेन हन-हन, सर्व-अभिचारं उलट-पुलट, प्रिं प्रिं परावर्तय, हुं हुं फट् फट्, महा-विस्फोटाय हुं हुं फट् फट् स्वाहा ॥"

मन्त्र की शक्तियाँ:

  • क्षौं: नृसिंह बीज जो हर डर को खत्म करता है।
  • प्रिं: प्रत्यङ्गिरा बीज जो वार को पलट देता है।
  • ब्रह्म-दण्ड: ईश्वरीय न्याय जो किसी भी चौकी को उखाड़ देता है।
सावधानी: ये मंत्र अत्यंत उग्र हैं। इनका प्रयोग केवल आत्म-रक्षा के लिए करें। किसी भी निर्दोष व्यक्ति को हानि पहुँचाने के उद्देश्य से किया गया जाप स्वयं के लिए विनाशकारी हो सकता है। पूर्ण शुद्धि और श्रद्धा के साथ ही इसका अभ्यास करें।

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